जब भारत के ज़्यादातर शहर नींद से जाग रहे होते हैं, तब अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों पर सूरज मुस्कुरा चुका होता है। यही वजह है कि इसे Land of the Rising Sun कहा जाता है। यह राज्य सिर्फ़ एक जगह नहीं, बल्कि एक एहसास है—शांत, सच्चा और प्रकृति के बेहद करीब।
पहाड़ों की गोद में बसी एक कहानी
अरुणाचल की सड़कें सिर्फ़ रास्ते नहीं हैं, बल्कि अनुभव हैं। एक मोड़ पर बादल हाथ छूने लगते हैं, तो दूसरे मोड़ पर झरनों की आवाज़ दिल को सुकून देती है। तवांग की बर्फ़ीली हवाएँ हों या ज़ीरो वैली की हरियाली—यहाँ हर जगह प्रकृति खुद बोलती है।
लोग जो संस्कृति को जीते हैं
यहाँ की जनजातियाँ किताबों में नहीं, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपनी परंपराएँ निभाती हैं। रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र, लोकगीतों की गूंज और त्योहारों की रौनक—सब कुछ बहुत असली लगता है। न्योकुम, लोसर और सोलुंग जैसे त्योहार यहाँ केवल उत्सव नहीं, बल्कि समुदाय को जोड़ने का ज़रिया हैं।
शोर से दूर, शांति के करीब
अरुणाचल प्रदेश उन लोगों के लिए है जो ट्रैफिक नहीं, पेड़ों की सरसराहट सुनना चाहते हैं। जो मोबाइल नेटवर्क से ज़्यादा, पहाड़ों से जुड़ना चाहते हैं। यहाँ समय धीमा चलता है, ताकि आप ज़िंदगी को महसूस कर सकें।
स्वाद जो मिट्टी से जुड़ा है
यहाँ का खाना दिखावे से दूर, सेहत के करीब होता है। बांस की कोपलें, स्थानीय जड़ी-बूटियाँ और ताज़ा सामग्री—हर स्वाद में पहाड़ों की सादगी झलकती है।
क्यों जाना चाहिए अरुणाचल?
क्योंकि कुछ जगहें घूमने के लिए नहीं, खुद को खोजने के लिए होती हैं।
अरुणाचल प्रदेश उन्हीं जगहों में से एक है।

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